
हाल के अध्ययनों से पता चला है कि ब्लू लाइट चश्मों की प्रभावशीलता संदिग्ध है। ये आंखों के तनाव या नींद की गुणवत्ता पर कोई विशेष असर नहीं डालते। 17 क्लीनिकल ट्रायल्स की समीक्षा में ब्लू लाइट फ़िल्टर वाले चश्मों के लाभों के लिए सीमित साक्ष्य मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट की तीव्रता आंखों को नुकसान पहुँचाने के लिए पर्याप्त नहीं होती। इसलिए ब्लू लाइट चश्मों पर निर्भर होने की बजाय विशेषज्ञ बार-बार स्क्रीन ब्रेक लेने, ब्राइटनेस समायोजित करने और रात में स्क्रीन का कम उपयोग करने की सलाह देते हैं। ब्लू लाइट मेलाटोनिन को प्रभावित कर सकती है जिससे नींद पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे लंबे समय तक आंखों को नुकसान होने की संभावना नहीं है। इन चश्मों की लोकप्रियता अधिकतर मार्केटिंग और अनुभवजन्य विश्वासों पर आधारित है, न कि वैज्ञानिक प्रमाणों पर।